पंचायत सहायक ने सौचालय सूची में पत्रों के साथ किया अनदेखी आपत्रो को बनाया पात्र ग्रामीणों ने किया जांच की मांग ।

पंचायत सहायक ने अपने अपात्र भाई घर परिवार सभी रिश्तेदार को किया पात्र ।

पंचायत सहायक द्वारा शौचालय ऑनलाइन करने में  किया धनउगाही जिम्मेदार मौन

आनंद कुमार गुप्ता 
निचलौल/महराजगंज
केंद्र सरकार का सबसे सफल योजना रहा है तो ओ स्वच्छ भारत मिशन के तहत   घर घर शौचालय बनाना उसके बावजूद भी  सरकार ने ग्राम सभा में सामुदायिक शौचालय का निमार्ण कराया और पूरे उत्तर प्रदेश के 95% से भी ज्यादा ग्राम सभाओं को ओडिएफ घोषित कर दिया लेकिन उसके बावजूद भी ब्लाक के कुछ भ्रष्ट ग्राम प्रधान सचिव पंचायत सहायक अधिकारी व कर्मचारी शौचालय के नाम पर लूट करने में लगे कुछ अपने घर के पूरे परिवार की नाम से शौचालय तो कुछ ने पूरे नाथ रिश्तेदारों का भी शौचालय का अप्रूवल कर दिया है और पात्र लोगों को रिजेक्ट कर दिया गया है ऐसा ही ताजा मामला महराजगंज जनपद के निचलौल ब्लाक के ग्राम सभा निपनिया में देखने को मिला है जहां पर पंचायत सहायक द्वारा शौचालय ऑनलाइन व वेरिफिकेशन में बृहद रूप से धांधली किया गया है वही पंचायत सहायक द्वारा अपने सगे संबंधी भाई- माता-पिता चाचा चाची सभी रिश्तेदारों के नाम से शौचालय ऑनलाइन कर अप्रूवल कर दिया गया है और पात्रों को अपात्र कर दिया गया है आपको बता दें कि पंचायत सहायक द्वारा शौचालय ऑनलाइन में ग्रामीणों से भी धन उगाई किया गया है जिसमें शौचालय ऑनलाइन के नाम पर पंचायत सहायक द्वारा ₹100 की धनराशि अवैध वसूली किया गया है इसके पूर्व भी पंचायत सहायक द्वारा आयुषमान कार्ड बनाने के नाम पर पूरे ग्राम सभा से भी 50-50 रु धन उगाही करने का भी महारथ हासिल जिसके बाद पंचायत सहायक ने ग्राम सभा को धन उगाही का अड्डा बना लिया है और तो और साल के 365 दिन में 65 दिन भी पंचायत भवन में ड्यूटी नही किया है महोत्रमा को अपने ड्यूटी से ज्यादा तैयारी में समय देती है अगर तैयारी ही करना है तो अपने पद से स्तीफा देकर तैयार8 करे क्योंकि गांव बहुत बेरोजगार है महिला है जो साल के 365 दिन ड्यूटी पूरे लग्न और निष्ठा से करने के आतुर है जब इस पूरे प्रकरण में ग्राम प्रधान से जानकारी लिया गया तो उन्होंने बताया कि मैं खुद परेशान हु सब कार्य मनमानी करती है जब मर्जी आती जब मर्जी नही आती है 
महिला होने के नाते कुछ दबाव नहीं बन पाता है इसका शिकायत मैं एडीओ विनय पाण्डे से भी कई बार किया हु 
लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। लेकिन इन सब बातो से सवाल उठना लाजमी है आखिर किसके सह पर इस तरह मनमानी एक पंचायत सहायक की हजम नही हो रहा है 
और  इससे साफ जाहिर होता है दाल में कुछ काला नही है पूरी दाल ही काली है। अब देखना है की इस खबर के बाद जिम्मेदारो के कान में जूं रेंगता है या नही या यूंही ग्रामीण भ्रष्टाचार के चक्की में पिसते रहेंगे।

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