महराजगंज का ‘चिता पहलवान’ श्यामकरण यादव, भूखा रहकर भी 50 बच्चों को सिखा रहा कुश्ती – लेकिन खुद के सपने तंगहाली में कैद

महराजगंज जनपद के बागपार गांव के रहने वाले यूपी के चिता पहलवान नाम से मशहूर श्यामकरण यादव की कहानी संघर्ष और समर्पण का प्रतीक है। देश के लिए खेलकर भारत का नाम रोशन करने का सपना देखने वाले श्यामकरण आज आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। महज जिम में तीन हज़ार रुपये की नौकरी कर वे अपना घर और अखाड़ा दोनों संभाल रहे हैं।

50 बच्चों को मुफ्त में दे रहे कुश्ती की ट्रेनिंग
हालांकि हालात कठिन हैं, लेकिन श्यामकरण का हौसला आज भी बुलंद है। वे न सिर्फ खुद की तैयारी करते हैं बल्कि 50 से अधिक बच्चों को निःशुल्क कुश्ती की ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। उनके अथक प्रयासों से महराजगंज और आसपास के कई युवा पहलवानी में आगे बढ़ रहे हैं।


बिरहा गायक पिता और संघर्ष की कहानी
श्यामकरण के पिता एक बिरहा गायक हैं, लेकिन आधुनिक गानों के दौर में यह लोककला धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि श्यामकरण को अपना और अखाड़े का खर्च चलाने के लिए छोटी-सी नौकरी करनी पड़ रही है।

नेशनल कुश्ती खेल चुके, हजारों मेडल जीते
श्यामकरण यादव पहले ही राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती में अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं। जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हजारों मेडल जीतकर उन्होंने महराजगंज का नाम रोशन किया है। उनकी मेहनत और लगन को देखते हुए उन्हें 29 अगस्त 2025 को “महराजगंज रत्न” सम्मान से नवाजा गया।

जरूरत है सहयोग की
आज श्यामकरण जैसे खिलाड़ी आर्थिक तंगी के कारण देश के लिए नहीं खेल पा रहे। अगर सरकार और समाज उनका सहयोग करे तो न सिर्फ महराजगंज बल्कि पूरा देश उन पर गर्व करेगा। श्यामकरण का मानना है कि “अगर मुझे बेहतर ट्रेनिंग और आर्थिक सहयोग मिले तो मैं भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीत सकता हूँ।”

 श्यामकरण यादव की यह कहानी बताती है कि असली हीरो वही है जो खुद भूखा रहकर भी दूसरों के सपनों को उड़ान देता है। जरूरत है तो बस हाथ बढ़ाने की, ताकि यह पहलवान भारत के लिए सोना जीत सके।

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