तेज़ रफ्तार का कहर: मां की नींद में उजड़ गया सहारा, खाई में डूब गया सूरज
(महाराजगंज/निचलौल)
महाराजगंज जनपद के निचलौल थाना क्षेत्र के ढेसो पुल के पास सड़क किनारे एक छोटा-सा छप्पर का घर था। उसी आशियाने में एक बुज़ुर्ग मां अपने जवान बेटे सूरज पांडेय के साथ रहती थी।
सूरज ही उसकी दुनिया था, वही उसकी लाठी, वही उसकी आंखों की रोशनी।
दोनों मूल रूप से गोला बाजार गोरखपुर के रहने वाले थे पिता के देहांत के बाद अपने मामा के वहां निचलौल क्षेत्र बजहा में कुछ समय रहे जिसके बाद वो ढेसो पुल पर चले आए गांव के भले लोगों की मदद से सड़क किनारे चंदा लगाकर मां-बेटा जैसे-तैसे जीवन गुज़ार रहे थे।
दिन भर मेहनत, और रात को मां के पास सिरहाने बैठकर सूरज कहता —
“मइया, चिंता मत करना… जब तक मैं हूँ, तुम्हें कुछ नहीं होगा।”
लेकिन किसे पता था कि एक रात सब कुछ छिन जाएगा।
उस रात मां और बेटा छप्पर के घर में गहरी नींद सो रहे थे।
तभी नशे में धुत एक तेज़ रफ्तार बोलेरो चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा।
पल भर में बोलेरो सीधे उस कच्चे घर में जा घुसी।
एक ज़ोरदार आवाज़…
चीख-पुकार…
और फिर सन्नाटा।
करीब एक घंटे की तलाश के बाद
सूरज पांडेय का शव खाई के पानी में मिला।
उसका सिर नीचे की ओर डूबा हुआ था,
शरीर बिल्कुल शांत…
जैसे सब कुछ सहकर चुप हो गया हो।
उस पल हर आंख नम थी,
लेकिन सबसे बड़ा दर्द और अफसोस की
सूरज की मौके पर ही मौत हो गई।
उधर घर को तोड़ते हुए बोलोरो पेड़ में लड़कर अटक गया और ड्राइवर भी गंभीर था
सबसे दर्दनाक बात यह थी कि बुज़ुर्ग मां को लोगों ने बताया कि उसको हल्की सी छोटे आई है सही हो जाएगा हॉस्पिटल गया है बोल कर लेकिन किसी ने ये नहीं कहा कि उसका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा।
क्योंकि सब जानते थे —
अगर मां को सच पता चला,
तो शायद वो सदमा सह नहीं पाएगी।
सुबह हुआ तो मां पूछती है
“सूरज कहां गया? सुबह से दिखा नहीं…”
और आस-पास के लोग आंखें चुराकर बस इतना कहते हैं —
“ हॉस्पिटल में है उसको हल्की चोट लगी है मइया, अभी आ जाएगा।”
अब कोई सहारा नहीं
जिस बेटे ने पूरी ज़िंदगी मां का सहारा बनकर बिताई,
आज उसी बेटे का सहारा लेने के लिए गांव वाले आगे आए हैं।
सूरज पांडेय का शव पोस्टमार्टम के लिए जा चुका था जिसको लेने जाने के लिए
अगल बगल के लोग चंदा इकट्ठा कर रहे हैं,
ताकि आख़िरी बार मां अपने बेटे का चेहरा देख सके —
या शायद… ना भी देखे।
क्योंकि कुछ सच
देखने से ज़्यादा
ना जानना ही बेहतर होते हैं।
“तेज़ रफ्तार और नशे में चलाया गया वाहन
आज एक बुज़ुर्ग मां का आख़िरी सहारा छीन ले गया।
सड़क पर लापरवाही सिर्फ़ एक गलती नहीं,
किसी की पूरी ज़िंदगी उजाड़ देती है।”
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