प्राकृतिक खेती में उत्कृष्ट योगदान के लिए नवरत्न तिवारी हुए सम्मानित


महराजगंज के सिसवा के युवा किसान बने युवाओं के प्रेरणास्रोत
महराजगंज (सिसवा)।
महराजगंज जनपद के सिसवा क्षेत्र निवासी युवा किसान नवरत्न तिवारी को प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान दिनांक 15 जनवरी को बस्ती में आयोजित किसान कनेक्शन कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती में विश्व युवक केंद्र, नई दिल्ली द्वारा किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्व युवक केंद्र नई दिल्ली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी उदय शंकर सिंह रहे।
इस अवसर पर नवरत्न तिवारी को प्राकृतिक खेती में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। साथ ही उन्हें प्राकृतिक कृषि पर अपने विचार रखने का अवसर भी प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि जल, जमीन और पर्यावरण का संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है, और इस दिशा में किसानों को जागरूक करना बेहद जरूरी है।
नवरत्न तिवारी एक आईटी सेक्टर के इंजीनियर होने के साथ-साथ एक प्रगतिशील किसान भी हैं। वे रेंट पर भूमि लेकर सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती पद्धति से खेती करते हैं। विशेष बात यह है कि वे किसानों को निःशुल्क प्रशिक्षण देकर रासायनिक एवं ज़हरीली दवाओं के प्रयोग से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करते हैं।
शून्य से शुरुआत कर आज उन्होंने लाखों रुपये तक का सफर तय किया है। उनके द्वारा उत्पादित कई प्राकृतिक कृषि उत्पाद खाड़ी देशों और यूरोप के कई देशों में निर्यात भी किए जा रहे हैं। वर्तमान में नवरत्न तिवारी महराजगंज जनपद के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं।
उनका यह सम्मान न केवल प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाला है, बल्कि युवाओं को खेती की ओर आकर्षित करने की दिशा में भी एक सकारात्मक संदेश देता है।

कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती में आयोजित किसान कनेक्शन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राकृतिक किसान नवरत्न तिवारी ने कहा कि आज देश की खेती एक निर्णायक दौर से गुजर रही है। रासायनिक खाद और ज़हरीली दवाओं के अत्यधिक उपयोग से जल, जमीन और पर्यावरण तीनों पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती ही भविष्य की खेती है, जिससे न केवल किसानों की लागत कम होती है बल्कि उपभोक्ताओं को भी सुरक्षित और ज़हर-मुक्त भोजन मिलता है। सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती पद्धति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि देशी गाय आधारित यह प्रणाली मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को आत्मनिर्भर बनाती है।

संवाददाता: आनंद कुमार गुप्ता 

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