महराजगंज में मनरेगा NMMS में चौंकाने वाला खेल: मजदूर गायब, हाजिरी में हाथ के पंजे हाजिर — भ्रष्टाचार हुआ और बेपर्दा
फेस रिकॉग्निशन से भ्रष्टाचार रोकेगा सिस्टम… मगर सिसवा ब्लॉक में सिस्टम को ही “उंगलियों पर नचा” दिया गया
महराजगंज आनंद कुमार गुप्ता
सरकार भले ही मनरेगा में पारदर्शिता लाने के लिए NMMS फेस रिकॉग्निशन हाजिरी जैसे आधुनिक सिस्टम लागू कर रही हो, लेकिन भ्रष्टाचार की पाठशाला में बैठे जिम्मेदार हर सिस्टम से एक कदम आगे निकलते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के महराजगंज जनपद के सिसवा ब्लॉक का है, जहां इंसान नहीं, हाथ के पंजे मनरेगा मजदूर बन गए हैं।
अब तक एक ही फोटो से कई-कई मस्टर रोल भरने की चर्चाएं थीं, लेकिन सिसवा ब्लॉक में तो भ्रष्टाचार ने तकनीक को भी मुंह चिढ़ा दिया। यहां NMMS हाजिरी में मजदूर के चेहरे की जगह हाथ के पंजे की फोटो अपलोड कर दी गई, और हाजिरी भी पूरी! यानी काम कागजों में पूरा, मजदूर मोबाइल में हाजिर और ज़मीन पर सन्नाटा।
यह गंभीर अनियमितता ग्राम पंचायत बेलभरिया में सामने आई है, जहां अंकुर के खेत से करमही सिवान तक नाला सफाई व मिट्टी कार्य मनरेगा के तहत दिखाया जा रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि काम से ज्यादा कमाल हाजिरी में दिखा, जहां मजदूर नहीं, पंजे काम पर भेजे गए।
अब सवाल यह नहीं है कि यह फर्जीवाड़ा कैसे हुआ, सवाल यह है कि यह सब किसकी निगरानी में हुआ?
क्या ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारी यह मान लें कि उन्हें इंसान और हाथ के पंजे में फर्क नहीं दिखता?
या फिर यह मान लिया जाए कि भ्रष्टाचार इतना नंगा हो चुका है कि अब उसे ढकने की भी जरूरत नहीं समझी जा रही?
जैसे ही मामला उजागर हुआ, जिम्मेदारों में हड़कंप मच गया और इसे दबाने, संभालने और मैनेज करने की कवायद शुरू हो गई। लेकिन यह घटना सिर्फ एक ग्राम पंचायत का मामला नहीं, बल्कि पूरे मनरेगा सिस्टम और NMMS निगरानी व्यवस्था पर करारा कटाक्ष है।
सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर सिस्टम बनाती है, और कुछ लोग उसे हाथों की उंगलियों पर गिनकर तोड़ने में लग जाते हैं। आज मजदूर रोजगार के लिए भटक रहा है और दूसरी तरफ हाथ के पंजे मनरेगा के स्थायी मजदूर बन चुके हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि
इस खबर के बाद भ्रष्टाचार पर कार्रवाई होगी या फिर पंजों से भरी हाजिरी की तरह यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?
क्योंकि अब सवाल सिर्फ इतना नहीं कि
“दाल में कुछ काला है?”
बल्कि यह है कि
“कहीं पूरी दाल ही मनरेगा की तरह पंजों से नहीं पकी?”
महराजगंज से आनंद कुमार गुप्ता की रिपोर्ट
Comments
Post a Comment