मनरेगा पंजा हाजिरी कांड में नोटिस जारी, कार्रवाई नदारद — दोषियों पर हाथ हल्का, मामले को “मैनेज” करने में जुटे जिम्मेदार
हाथ के पंजे से NMMS हाजिरी भरने वाले रोजगार सेवक को नोटिस, लेकिन मस्टरोल शून्य कर बचाव की कोशिश तेज
महराजगंज जनपद के सिसवा ब्लॉक में मनरेगा NMMS हाजिरी में हाथ के पंजे से उपस्थिति दर्ज करने के सनसनीखेज मामले में अब विभाग की ओर से औपचारिक नोटिस तो जारी कर दिया गया है, लेकिन ठोस कार्रवाई के बजाय मामले को मैनेज करने का खेल खुलकर सामने आ रहा है।
खंड विकास अधिकारी, सिसवा द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि दिनांक 04.01.2026 को NMMS ऐप के माध्यम से श्रमिक के चेहरे के बजाय हाथ के पंजे की फोटो अपलोड कर हाजिरी लगाई गई, जो गंभीर अनियमितता की श्रेणी में आता है। हैरानी की बात यह है कि इससे पहले भी संबंधित रोजगार सेवक को गलत हाजिरी को लेकर चेतावनी दी जा चुकी थी, बावजूद इसके दोबारा वही कृत्य दोहराया गया।
नोटिस में यह भी स्वीकार किया गया है कि ग्राम पंचायत बेलभरिया में चल रहे नाला सफाई व मिट्टी कार्य के मस्टरोल में फर्जी हाजिरी दर्ज की गई, जिसके बाद मस्टरोल को शून्य करने का निर्देश दिया गया। सवाल यह उठता है कि
👉 अगर अपराध साबित है तो सिर्फ मस्टरोल शून्य करना ही पर्याप्त कार्रवाई कैसे हो सकती है?
👉 क्या मस्टरोल शून्य करने से NMMS में दर्ज पंजा हाजिरी अपने आप खत्म हो जाएगी?
यह पूरा मामला अब भ्रष्टाचार पर कार्रवाई कम और लीपापोती ज्यादा का उदाहरण बनता जा रहा है। नोटिस जारी कर यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि विभाग गंभीर है, जबकि जमीनी सच्चाई यह है कि दोषियों को बचाने और ऊपर तक जिम्मेदारी न जाने देने की कवायद तेज हो गई है।
सबसे बड़ा सवाल NMMS सिस्टम पर भी खड़ा हो रहा है। जिस तकनीक को भ्रष्टाचार रोकने का हथियार बताया गया था, उसी तकनीक से हाथ के पंजे मजदूर बनकर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो गए। और जब मामला उजागर हुआ तो सिस्टम सुधारने के बजाय सबूत मिटाने की कोशिश शुरू हो गई।
अब यह मामला केवल एक रोजगार सेवक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि
ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की निगरानी,
जिला स्तर की मॉनिटरिंग,
और मनरेगा प्रशासन की मंशा—तीनों पर सवाल खड़े कर रहा है।
लोगों का कहना है कि अगर मीडिया में मामला न आता तो शायद
न नोटिस जारी होता,
न मस्टरोल शून्य होता,
और पंजा हाजिरी आराम से भुगतान तक पहुंच जाती।
अब देखना यह है कि
🔹 क्या नोटिस के बाद वास्तविक अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी?
🔹 या फिर यह मामला भी अन्य मनरेगा घोटालों की तरह
“नोटिस–मैनेज–फाइल बंद” की प्रक्रिया में दफन कर दिया जाएगा?
क्योंकि फिलहाल स्थिति यही बता रही है कि
यहां भ्रष्टाचार पर चोट नहीं, सिर्फ खरोंच लगाई जा रही है।
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संवाददाता आनंद कुमार गुप्ता
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